Ovary Kya Hota Hai? – Ovary Meaning in Hindi

by | Mar 20, 2023 | Fertility

ओवरी क्या है /Ovary Kya Hota Hai? (What is Ovary Meaning in Hindi)

ओवरी (Ovary) एक महिला प्रजनन तंत्र का महत्वपूर्ण अंग होता है। यह महिलाओं के शरीर में उत्पादन होने वाले अंडों को तैयार करता है। इसके साथ ही यह शरीर में स्त्री हॉर्मोन का उत्पादन भी करता है जो महिलाओं के लिए आवश्यक होते हैं।

Ovary Meaning in Hindi

Ovary Meaning in Hindi

ओवरी सामान्यतः एक जोड़ी में पायी जाती है। इनकी आकार व मात्रा महिला के उम्र व अन्य तत्वों पर निर्भर करती हैं। इनकी संरचना गोल होती है जिसमें छोटे छोटे संग्रहालय होते हैं जिसे फोलिकल कहा जाता है। ये फोलिकल अंडों को उत्पादित करते हैं।

 

ओवरी क्या करते हैं? (What Ovaries do)

ओवरी का मुख्य काम अंडों को तैयार करना होता है जिसे ओवुलेशन (Ovulation) कहा जाता है। ओवुलेशन एक संयोजनक्रिया होती है जिसमें फोलिकल में संग्रहित अंडा शिशु के जन्म के लिए तैयार होता है। अंडे उत्पन्न होते हैं जब ओवरी में हॉर्मोन के विकसित होने से फोलिकल फट जाते हैं।

इसके साथ ही ओवरी में महिलाओं के उत्पादन के साथ-साथ यह तथ्यांश भी उत्पन्न करती है कि किस हॉर्मोन को ज्यादा उत्पादित करना होगा जो उत्पन्न हुआ अंडा और गर्भाशय की भूमिका के विकास में मदद करता है।

ओवरी के अंडों का प्रतिरोधक तंत्र काफी महत्वपूर्ण होता है। यह उत्पन्न हुए अंडे को नष्ट करने वाले कोशिकाओं से लड़ता है और उन्हें तब तक बचाता है जब तक गर्भाशय में नहीं जाते हैं। इसके अलावा, यह महिलाओं के शरीर में पुरुषों की तुलना में कम होमोन टेस्टोस्टेरोन उत्पन्न करता है।

ओवरी में कुछ समस्याएं भी होती हैं जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होती हैं। जैसे कि, पोलिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), जिसमें अंडों के उत्पादन में असामान्यताएं होती हैं जो शारीर के अन्य हिस्सों पर भी असर डाल सकती हैं।

इस प्रकार, ओवरी एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग होता है जो महिलाओं के शारीर में उत्पादन होने वाले अंडों को तैयार करता है और उनके साथ-साथ महिलाओं के लिए आवश्यक होमोन उत्पन्न करता है। इसे समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर ओवरी में किसी तरह की समस्या होती है, तो इससे महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।

 

ओवरी कौन से हार्मोन का उत्पादन करते हैं? (Which Hormones does Ovary Produce)

ओवरी में अनेक प्रकार के हार्मोन उत्पन्न होते हैं जो महिलाओं के शारीर में अहम भूमिका निभाते हैं।

  1. एस्ट्रोजन (Estrogen) – यह हॉर्मोन महिलाओं के शारीर में उत्पन्न होता है और ओवरी में उत्पादित होता है। यह हॉर्मोन महिलाओं के शारीर में अहम भूमिका निभाता है जैसे कि अंडों के विकास, गर्भाशय के विकास और स्तनों का विकास।
  2. प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) – यह हॉर्मोन भी महिलाओं के शारीर में उत्पन्न होता है और ओवरी में उत्पादित होता है। यह हॉर्मोन गर्भावस्था के दौरान अहम भूमिका निभाता है और गर्भावस्था के दौरान शिशु के संवर्धन के लिए जरूरी होता है।
  3. टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) – यह हॉर्मोन पुरुषों के शारीर में ज्यादा मात्रा में पाया जाता है लेकिन यह ओवरी में भी उत्पादित होता है। यह हॉर्मोन महिलाओं के शारीर में बालों, खुशबू और गर्मी जैसे विभिन्न विशेषताओं के लिए जिम्मेदार होता है। इसके साथ ही यह शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में कम मात्रा में होता है।

 

ओवरी कहाँ स्थित होते हैं? (Where is Ovary Located)

ओवरी महिलाओं के शरीर में प्रजनन सिस्टम का एक अहम अंग होती है। इन्हें प्रजनन अंगों में से एक माना जाता है। ओवरी महिलाओं के पेट के अंदर, पैरों के बीच और पेट के दोनों ओर होती हैं।

ओवरी एक जोड़ी में होती है जो महिलाओं के शरीर में उत्पादन होने वाले अंडों को तैयार करती है। इनके आकार व मात्रा महिला के उम्र व अन्य तत्वों पर निर्भर करती हैं। ओवरी के बढ़ जाने या कम होने के कई कारण होते हैं जैसे कि उम्र, गर्भावस्था और समस्याएं जो इन्हें प्रभावित कर सकती हैं।

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ओवरी का आकार बदलने के कारण (Reasons of Ovary Size Change):

ओवरी का आकार बदलने के कई कारण होते हैं। कुछ महत्वपूर्ण कारण निम्नलिखित हैं।

  1. उम्र – महिलाओं के उम्र के साथ ओवरी का आकार घटता है। अधिकतम आकार अक्सर 20 साल की उम्र में प्राप्त होता है।
  2. गर्भावस्था – गर्भावस्था के दौरान भी ओवरी का आकार बढ़ जाता है। यह अंडों के विकास के लिए जरूरी होता है।
  1. सिस्ट्स – ओवरी में सिस्ट्स या गांठ होने से भी इनका आकार बढ़ता है।
  2. स्तन कैंसर – स्तन कैंसर के कुछ मामलों में, अंडाशय के साथ साथ ओवरी को भी हटा दिया जाता है, जिससे इनका आकार कम हो जाता है।
  3. पोलिस्टिक ओवरी सिंड्रोम – इस समस्या में, ओवरी में असामान्य गांठों या सिस्ट्स उत्पन्न होते हैं जो उनके आकार में बदलाव लाते हैं।

ओवरी का आकार बदलना सामान्य होता है और यह शरीर के विभिन्न तत्वों पर निर्भर करता है। यदि आकार में असामान्य बदलाव हो रहे हों, तो इसे चिकित्सक की सलाह लेना उचित होगा।

 

ओवरी की समस्या क्या हैं? (Types of Fertility Disease in Ovary):

ओवरी एक महत्वपूर्ण अंग होती है जो महिलाओं के शरीर में प्रजनन के लिए अहम भूमिका निभाती है। इसलिए, यदि इन्हें कोई समस्या होती है, तो इससे महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। निम्नलिखित कुछ आम समस्याएं ओवरी में हो सकती हैं जो महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य पर असर डालती हैं।

  1. पोलिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) – इस समस्या में, ओवरी में असामान्य गांठों या सिस्ट्स उत्पन्न होते हैं जो उनके आकार में बदलाव लाते हैं। यह समस्या महिलाओं की बाँझपन या अनियमित मासिक धर्म के कारण होती है।
  2. अंडाशय के सिस्ट्स (Ovarian Cyst) – यह एक और ओवरी की समस्या है जो महिलाओं में आम होती है। इसमें एक या एक से अधिक सिस्ट अंडाशय में उत्पन्न होते हैं जो उनके आकार में बढ़ोतरी लाते हैं।
  3. अंडाशय में किसी संक्रमण की समस्या – यह भी एक और आम समस्या होती है जो ओवरी को प्रभावित कर सकती है।
  4. एंडोमेत्रियोस – इस समस्या में, ओवरी को घेरने वाले ऊतकों के आसपास के क्षेत्र में असामान्य विकास होता है। इससे महिलाओं में पेट में दर्द, अनियमित मासिक धर्म और बाँझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

 

ओवरी की समस्याओं के लक्षण क्या हैं?(Symptoms of Fertility Disease in Ovary in Hindi):

ओवरी में समस्याओं के लक्षण अलग-अलग होते हैं। निम्नलिखित कुछ सामान्य लक्षण हैं जो इससे जुड़े हो सकते हैं।

  1. पेट में दर्द
  2. अनियमित मासिक धर्म
  3. बाँझपन
  4. थकान या कमजोरी
  5. बार-बार उलटी करना
  6. भारी पीरियड्स
  7. सेक्स में दर्द
  8. स्तनों में सूजन

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ओवरी की समस्याओं के कारण  (Causes of Fertility Disease of Ovary in Hindi):

ओवरी में समस्याएं होने के कई कारण हो सकते हैं। निम्नलिखित कुछ सामान्य कारण हैं जो इससे जुड़े हो सकते हैं।

  1. उम्र – महिलाओं की उम्र बढ़ने के साथ, ओवरी में समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है।
  2. गर्भावस्था – गर्भावस्था के दौरान, ओवरी में समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है।
  3. रसोली का विकास – रसोली ओवरी में एक छोटी सी गांठ होती है जो समस्याएं पैदा कर सकती है।
  1. रोग – कुछ रोग जैसे मधुमेह, सिरोसिस और स्तन कैंसर ओवरी में समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
  2. वास्तविक समय ग्रहण – ओवरी के दुर्गन्ध आणवों को उनके संबंधित समय पर उपयोग न करने से भी समस्याएं हो सकती हैं।
  3. वजन – अतिरिक्त वजन लेने से भी ओवरी में समस्याएं हो सकती हैं।
  4. नियमित रूप से नियंत्रण न होने वाला मासिक धर्म – अनियमित मासिक धर्म वाली महिलाओं में ओवरी में समस्याएं होने की संभावना अधिक होती है।
  5. रसोली का संदर्भित विशेषज्ञ न होना – अगर रसोली विशेषज्ञ द्वारा निगरानी नहीं की जाती है, तो यह समस्याएं बढ़ा सकती हैं।

ओवरी में समस्याएं होने की संभावना बढ़ाने वाले कई अन्य कारक भी हो सकते हैं। यदि किसी महिला को ओवरी समस्याएं होती हैं, तो वह इसे जांचअभिलेख के लिए चिकित्सक की सलाह लेना चाहिए।

ओवरी की समस्याओं की जटिलताएं (Complications due to Fertility Disease of Ovary in Hindi):

ओवरी में समस्याएं होने से कुछ जटिलताएं हो सकती हैं जो निम्नलिखित हैं:

  1. बाँझपन – ओवरी में समस्याएं होने से महिलाओं में बाँझपन की समस्या हो सकती है।
  2. अनियमित मासिक धर्म – ओवरी में समस्याएं होने से महिलाओं में अनियमित मासिक धर्म की समस्या हो सकती है।
  3. सेक्स में दर्द – ओवरी में समस्याएं होने से महिलाओं में सेक्स में दर्द की समस्या हो सकती है।
  4. पेट में दर्द – ओवरी में समस्याएं होने से महिलाओं में पेट में दर्द की समस्या हो सकती है।
  5. अनियमित गर्भाधान – ओवरी में समस्याएं होने से महिलाओं में अनियमित गर्भाधान की समस्या हो सकती है।

 

ओवरी की समस्याओं  को कैसे रोकें (Prevention of Fertility Disease of Ovary in Hindi):

कुछ तरीकों से महिलाएं अपनी ओवरी समस्याओं को रोक सकती हैं। इनमें से कुछ हैं:

  1. स्वस्थ खानपान – स्वस्थ खानपान के बारे में सोचना बहुत महत्वपूर्ण है। स्वस्थ खाने-पीने से शरीर स्वस्थ रहता है और ओवरी समस्याएं होने की संभवावना कम होती है।
  1. व्यायाम – नियमित व्यायाम करना ओवरी समस्याएं को रोकने में मददगार हो सकता है।
  2. स्वस्थ वजन – स्वस्थ वजन बनाए रखना ओवरी समस्याओं से बचाव करने में मददगार हो सकता है।
  3. नियमित जांच – नियमित जांच के माध्यम से ओवरी समस्याओं को पहचाना जा सकता है और समय रहते उपचार करने से इन समस्याओं से बचा जा सकता है।
  4. स्वस्थ जीवन शैली – स्वस्थ जीवन शैली अपनाना ओवरी समस्याओं से बचने में मददगार हो सकता है। धूम्रपान और अतिरिक्त शराब पीना इन समस्याओं का कारण बन सकता है, इसलिए इन्हें न करना बेहतर होगा।

 

ओवरी की समस्याओं  की  दवाइयाँ (Medications of Fertility Disease of Ovary in Hindi):

ओवरी समस्याएं के इलाज के लिए विभिन्न दवाइयों का उपयोग किया जाता है। ये दवाएं हॉर्मोन उत्पादन को संतुलित करने और ओवरी समस्याओं के इलाज में मदद करने के लिए प्रयोग की जाती हैं। कुछ सामान्य दवाएं निम्नलिखित हैं:

  1. क्लोमिफेन साइट्रेट – यह दवा महिलाओं में ओवरी के अनुकूल उत्पादन को बढ़ाती है जिससे गर्भावस्था के अवसर बढ़ते हैं।
  1. गोनाडोत्रोपिन – यह दवा ओवरी के हॉर्मोन उत्पादन को बढ़ाती है जिससे ओवुलेशन होता है और गर्भाधान के अवसर बढ़ते हैं।
  2. अंडाशय उत्तेजक दवा – इस दवा का उपयोग अंडाशयों को उत्तेजित करने के लिए किया जाता है जो गर्भाधान के अवसरों को बढ़ाता है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी भी दवा का उपयोग केवल चिकित्सक की सलाह लेकर ही किया जाना चाहिए। दवाओं के उपयोग से पहले चिकित्सक से बात करना बेहतर होगा जो आपकी समस्या का उपचार करने के लिए सही दवा निर्धारित करेंगे।

 

ओवरी की समस्याओं  का जांच कैसे होता है (Diagnosis of Fertility Disease in Ovary in Hindi):

ओवरी समस्याओं की जांच के लिए निम्नलिखित परीक्षण होते हैं:

  1. सामान्य जांच – चिकित्सक महिला का शरीर जांच करता है और उनकी बातचीत से समस्या के बारे में जानकारी प्राप्त करता है।
  2. सोनोग्राफी – सोनोग्राफी एक परीक्षण है जिसमें ऑडियो वेव गुणवत्ता के साथ एक प्रकार का स्कैनिंग प्रणाली उपयोग करते हुए शरीर की तस्वीर ली जाती है। इस जांच से ओवरी की समस्याओं की पहचान की जा सकती है।
  3. हॉर्मोन परीक्षण – हॉर्मोन परीक्षण ओवरी की समस्याओं की जांच में उपयोग किया जाता है। इससे हॉर्मोन के स्तर का मापन किया जाता है जो ओवरी समस्याओं की पहचान में मदद करता है।
  4. लैपरोस्कोपी – लैपरोस्कोपी एक चिकित्सा प्रक्रिया है जिसमें एक छोटी से छोटी कटाव के माध्यम से एक ऑपरेशन किया जाता है। इससे ओवरी की समस्याएं की पहचान की जा सकती है।

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ओवरी की समस्याओं का उपचार क्या हैं? (Treatment of Fertility Disease in Ovary in Hindi):

ओवरी समस्याओं का उपचार निम्नलिखित हो सकता है:

  1. दवाएं – ओवरी समस्याओं के इलाज के लिए विभिन्न दवाएं का उपयोग किया जाता है। ये दवाएं हॉर्मोन उत्पादन को संतुलित करने और ओवरी समस्याओं के इलाज में मदद करने के लिए प्रयोग की जाती हैं। कुछ सामान्य दवाएं निम्नलिखित हैं:
  • क्लोमिफेन साइट्रेट
  • गोनाडोत्रोपिन
  • अंडाशय उत्तेजक दवा
  1. सर्जरी – अधिक गंभीर मामलों में, जैसे कि अंडाशय के ट्यूमर या बदलते हुए ऑवरियन सिस्ट के मामलों में, सर्जरी की आवश्यकता होती है।
  2. आर्टिफिशियल इंसीमिनेशन (एआई) – एआई एक उपचार है जो कई स्त्रियों को बाल्यवस्था प्राप्त करने में मदद करता है। यह इलाज हॉर्मोन उत्पादन बढ़ाने के लिए और गर्भाधान के अवसरों को बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है।

इन विकल्पों के अलावा अन्य उपचार भी मौजूद हैं जो ओवरी समस्याओं के उपचार में मददगार हो सकते हैं। चिकित्सक के सुझाव पर

 

निष्कर्ष:

ओवरी महिलाओं में महत्वपूर्ण अंग होते हैं जो फर्टिलिटी और स्त्री रोगों के संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ओवरी में उत्पन्न होने वाले असामान्य बदलाव स्त्री रोगों के कारण बन सकते हैं, जो फर्टिलिटी को प्रभावित करते हैं।

अगर आपको लगता है कि आपके शरीर में ओवरी समस्याएं हैं, तो आपको चिकित्सक से बात करना चाहिए। उन्हें आपकी समस्या के साथ बेहतर से वाकई वाकई समझने में मदद मिलेगी और आपको उचित उपचार का सुझाव दिया जाएगा।

फर्टिलिटी संबंधी समस्याओं को समझना और इनका समाधान करना महत्वपूर्ण होता है। इससे न केवल स्त्रियों को फर्टिलिटी के मुद्दों से निपटने में मदद मिलती है, बल्कि उन्हें यह भी समझने में मदद मिलती है कि वे अपनी स्वस्थ जीवनशैली को कैसे बेहतर बना सकती हैं।

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 F.A.Q:

क: ओवरी और बच्चेदानी में क्या अंतर है?

जवाब: ओवरी और बच्चेदानी महिला जननांग के दो अलग-अलग अंग होते हैं। ओवरी अंडे और हार्मोन उत्पादन के लिए ज़िम्मेदार होती है, जबकि बच्चेदानी गर्भावस्था के दौरान फर्टिलाइज़्ड अंडों को निवास स्थान और विकास के लिए प्रदान करती है।

क: महिलाओं में ओवरी क्या होती है?

जवाब: ओवरी महिला जननांग का एक छोटा ग्रंथियों से भरा अंग होता है जो अंडों और हार्मोन उत्पादन के लिए ज़िम्मेदार होता है।

क: ओवरी का अर्थ क्या होता है?

जवाब: ओवरी शब्द का अर्थ होता है ‘अंडाशय’।

क: ओवरी निकालने से क्या होता है?

जवाब: यदि ओवरी को हटा दिया जाता है, तो उसकी जगह अंडाशय की काम करने में समस्या हो सकती है। ओवरी के हटाने के बाद महिला के शरीर में हॉर्मोन बदलाव हो सकते हैं जो फर्टिलिटी पर असर डाल सकते हैं।

क: ओवरी का नार्मल साइज कितना होता है?

जवाब: ओवरी का नार्मल साइज महिलाओं में अलग-अलग होता है। सामान्यतया, ओवरी का आकार लगभग आंट के आकार से कम होता है और उसकी लंबाई लगभग 3 सेमी होती है।

क: अगर गर्भाशय हटा दिया जाता है तो क्या होता है?

जवाब: अगर गर्भाशय हटा दिया जाता है, तो उससे बच्चेदानी अधूरी हो जाती है जो महिला के जीवन में कुछ स्थायी परिवर्तनों का कारण बन सकता है।

क: बच्चेदानी में ओवरी क्या होती है?

जवाब: बच्चेदानी में ओवरी महिला के जननांग का एक हिस्सा होती है जो अंडों और हार्मोन उत्पादन के लिए ज़िम्मेदार होती है।

क: ओवरी में गांठ कैसे बनता है?

जवाब: ओवरी में गांठ के बनने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि सिस्ट, फाइब्रॉएड, ट्यूमर आदि। इनमें से अधिकांश कारण अजीर्ण अंडे या अजीर्ण फोलिकल होते हैं।

क: औरत में अंडे कहाँ जमा होते हैं?

जवाब: ओवरी में अंडे जमा होते हैं जो बाद में गर्भाशय में जाते हैं। यह गर्भनाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं जो गर्भधारण के लिए ज़रूरी होते हैं।

क: ओवरी में कितने अंडे होते हैं?

जवाब: ओवरी में सामान्यतः हर महीने एक अंडा उत्पन्न होता है, लेकिन कुछ महिलाओं में दो अंडे भी उत्पन्न हो सकते हैं।

क: Egg नहीं बनने का क्या कारण है?

जवाब: अंडों के न उत्पन्न होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि हॉर्मोन असंतुलन, असंतुलित खानपान, सिस्ट आदि।

क: बच्चेदानी में गांठ होने से क्या प्रॉब्लम होती है?

जवाब: बच्चेदानी में गांठ होने से फर्टिलिटी समस्याएं, गर्भाशय के असामान्य ब्लीडिंग, गर्भपात, पीठ दर्द, पेट में सूजन, बुखार आदि समस्याएं हो सकती हैं।

क: क्या बिना गर्भाशय के पीरियड हो सकते हैं?

जवाब: नहीं, गर्भाशय के बिना पीरियड होना सम्भव नहीं होता।

क: अंडाशय और गर्भाशय निकालने के बाद क्या होता है?

जवाब: अंडाशय और गर्भाशय को निकालने के बाद महिला के जीवन में कुछ स्थायी परिवर्तन हो सकते हैं। यह महिला के फर्टिलिटी को अस्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है

क: ओवरी में सिस्ट हो तो क्या नहीं खाना चाहिए?

जवाब: ओवरी में सिस्ट होने पर कुछ खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए जैसे कि मीठा खाने से बचें, तले हुए चीज़े नहीं खाएं, कॉफी नहीं पीना चाहिए आदि।

क: क्या बिना अंडाशय के पीरियड हो सकता है?

जवाब: नहीं, बिना अंडाशय के पीरियड होना सम्भव नहीं होता। अंडाशय में होने वाली हार्मोनल प्रक्रियाओं के बिना पीरियड होना संभव नहीं है।

क: क्या आप बिना गर्भाशय के रह सकते हैं?

जवाब: नहीं, गर्भाशय महिलाओं में गर्भधारण के लिए ज़रूरी होता है। इसके बिना महिला गर्भधारण नहीं कर सकती।

क: गर्भाशय को निकलवाने की जरूरत कब पड़ती है?

जवाब: गर्भाशय को निकलवाने की जरूरत अस्थायी या स्थायी प्रोब्लमों जैसे गर्भपात, बच्चेदानी के संक्रमण आदि के मामलों में पड़ती है।

क: गर्भाशय कब निकालना चाहिए?

जवाब: गर्भाशय को निकालने का फैसला एक चिकित्सक द्वारा किया जाना चाहिए। यह निर्णय समस्या के गंभीरता और उम्र के आधार पर लिया जाता है।

क: बच्चेदानी खराब होने के लक्षण क्या हैं?

जवाब: बच्चेदानी के संक्रमण, गांठ, ब्लीडिंग, पेशाब में तकलीफ, पेट दर्द आदि कुछ लक्षण हो सकते हैं।

क: प्रेग्नेंट होने के लिए ओवरी का कितना होना चाहिए ओवरी साइज?

जवाब: एक सामान्य ओवरी का आकार 1.5 से 3 सेंटीमीटर होता है, लेकिन इसके अलावा भी कई तत्व होते ह

क: ओवरी का आकार साइज कितना होता है?

जवाब: एक सामान्य ओवरी का आकार 1.5 से 3 सेंटीमीटर होता है, लेकिन इसके अलावा भी कई तत्व होते हैं जैसे उम्र, स्वास्थ्य आदि जो ओवरी के आकार पर प्रभाव डालते हैं।

क: एक महिला के पास कितने अंडाशय होते हैं?

जवाब: हर महिला के दो अंडाशय होते हैं।

क: क्या ओवरी का साइज प्रेगनेंसी के लिए अहम होता है?

जवाब: हाँ, ओवरी का साइज भी गर्भावस्था के लिए अहम होता है। इससे हार्मोन की उत्पादन में बदलाव होता है जो गर्भवती महिला के शरीर में ज़रूरी होते हैं।

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